आधुनिक हिंदी साहित्य में राष्ट्रीय चेतना

Authors

  • श्री धर्मवीर सहायक प्राध्यापक, भारती संस्कृति एवं भाषा विभाग चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी ( हरियाणा )

Keywords:

आधुनिक हिंदी साहित्य, राष्ट्रीय चेतना

Abstract

आधुनिक हिंदी साहित्य में राष्ट्रीय चेतना समाज की प्राणशक्ति के रूप में उभरी है। जिसने सुप्त समाज के लोगों में जागरण की लहर चलाई और लोगों में स्वाधीनता की ललक जगाकर भारत की आजादी में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 आधुनिक हिन्दी साहित्य में भारतीय संस्कृति, भारतीय राजनीति और भारतीय समाज के विकास यात्रा की जानकारी मिलती है। राष्ट्रीय जागरण के जिस अनुभव को भारतीय समाज ने महसूस किया भारतेन्दु युग से वह प्रभाव भी साहित्य पर पड़ना शुरू हो गया। राष्ट्रीय चेतना में सामाजिक एकता, ऐतिहासिक गौरव, मानवीय मूल्य और अपनी संस्कृति के प्रति स्वाभिमान जैसे विषयों के समन्वित रूप शामिल होते हैं। हिन्दी साहित्य में यह चेतना साहित्य की अनेक विधाओं में दिखाई देती है। जिसमें कविता, कहानी, निबंध, नाटक व अन्य राष्ट्रवादी लेखों और चिंतनों में भी दिखाई देती है । राष्ट्रीय चेतना देश के नागरिकों में अपने देश के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को प्रदीप्त करता है। जिसमें राष्ट्र के प्रति प्रेम, राष्ट्र के गौरव और अपना देश के प्रति कर्तव्य भी शामिल होता है ।

Downloads

Published

02-03-2026

Issue

Section

Articles